हड़प्पा सभ्यता

हड़प्पा सभ्यता

आज मैं आप को हड़प्पा सभ्यता के बारे में बताने जा रहा हूँ। आप सब जानते ही होंगे कि हड़प्पा सभ्यता भारत की प्राचीन सभ्यता में से एक हैं। हड़प्पा सभ्यता भारत की सबसे पहली शहरी सभ्यता हैं। यह सभ्यता लगभग 5000 वर्ष पुरानी मानी हैं।

हड़प्पा सभ्यता

 

नामकरण

1.हड़प्पा सभ्यता

इस सभ्यता की सबसे पहले जानकारी हमें हड़प्पा नाम स्थान पर मिली थी। इसलिए अधिकतर लोग इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता नाम से जाना जाता हैं।

2.सिन्धु घाटी की सभ्यता

इस सभ्यता को सिन्धु घाटी की सभ्यता के नाम से भी जाना जाता हैं।क्योंकि शुरुबती दिनों में इस सभ्यता के प्रमुख केन्द्र सिन्धु नदी के आस पास मिले थे।

3.कांसे युगीन सभ्यता

इस सभ्यता को कांसे युगीन सभ्यता भी कहा जाता था क्योंकि अत्यधिक लोगों ने कांसे का प्रयोग किया था। आपने बर्तन,औजार,मुर्तियाँ बनाने के लिए किया जाता था।

हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख केन्द्र

हड़प्पा सभ्यता की सबसे पहले जानकारी अलेकजेण्डर कर्निघम ने 1875 में की थी। हड़प्पा सभ्यता के लगभग एक हज़ार के आसपास केंद्र हैं। हड़प्पा सभ्यता लगभग 12,99,600 कि.मी में फैली हुई थीं। हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख केन्द्र का वर्णन इस प्रकार से हैं।

1.हड़प्पा

हड़प्पा सभ्यता की खोज सबसे पहले 1921 दयाराम साहनी ने की थी। हड़प्पा आधुनिक पाकिस्तान के पंजाब के नजदीक राबी नदी के किनारे में बसा हैं, इसी के कारण इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा था।
यहाँ की सड़के और नालियाँ पक्की थी। मकान पक्की ईटों के बने हुए थे। हड़प्पा सभ्यता में का सबसे बड़ा नगर हड़प्पा था। इस नगर को शत्रु से बचने के लिए चारों ओर से बड़ी-बड़ी दीवारें बना थी।

मोहनजोदड़ो

मोहनजोदड़ो का वास्तविक अर्थ मृतकों का टीला है क्योंकि इतिहासकारों का अनुमान है कि यह नगर सात बार बना और सात बार ही उझड़ा होगा। मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के अरकाना ज़िले में स्थित है।
यह मुख्य व्यापारी केंद्र भी था। मोहनजोदड़ो में हमे एक बहुत ही स्नान गृह भी मिला है । साथ में एक कांसे की मूर्ति भी मिली है जो की नर्तकी की थी। वहाँ कई मोहरें और आभूषण भी मिले है। इसकी खोज 1922 में यखदास ने की थी।

रोपड़

इस केंद्र की खोज 1951 में हुई थी यह नगर सतलुज नदी के किनारे में बसा हुआ था। यहाँ पर अनेक आभूषण मूर्तियाँ,मोहरे प्राप्त हुई है।

काली बंगा

काली बंगा राजस्थान में है। काली चुड़ी के कारण इस जगह का नाम काली बंगा पड़ा है। इस की खोज 1953 में ही की गई थी। यहाँ पर भी हमें इस सभ्यता की जानकारी मिलती है।

लोथल

लोथल नाम की जगह गुजरात में पड़ती है। यहाँ पर हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख बन्दरगाह हुआ करती थी। यही से
दूसरे देशों के साथ व्यापार किया जाता था।

घोलवीरा

घोलावीरा भी आधुनिक गुजरात में ही पड़ता है। यहाँ पर मनको को छेद करने के कई उपकरण लगाए जाते है। यहाँ पर बड़े-बड़े जलाशय मिले है ,जिन से खेतों की सिचाई की जाती थी।

आलमगीरपुर

आलमगीरपुर आधुनिक उत्तर प्रदेश में पड़ता है। यहाँ पर भी हड़प्पा सभ्यता की जानकारी मिलती है।

वनवाली

वनवाली यह स्थान हरियाणा के जिले इसार में पड़ता है। यहाँ पर भी आभूषण, मूर्तियाँ,मोहरें खुदाई के दौरान प्राप्त हुए है।

सघोल

सघोल यह स्थान पंजाब के लुधियाना स्थान में है। यहाँ भी हड़प्पा सभ्यता की जानकारी मिली है।

हड़प्पा सभ्यता नगर योजना

हड़प्पा सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी । यहां के नगर एक योजना के तहत बनाये हुए थे । उनकी भवन निर्माण कला उच्च कोटि स्तर की थी । जिनका विवरण इस प्रकार से है ।

भवन

हड़प्पा लोगों के भवन पक्की ईटों के बने हुए थे । इन भवनों की नींव काफी मजबूत थी । भवन दो मंजिला से लेकर तीन मंजिल तक हुआ करते थे । खिड़कियां और दरवाजे काफी बड़े हुआ करते थे ।

रोशनी के लिए रोशनदान रखे जाते थे।हर घर का अपना आंगन रसोई और अपना स्नानगृह हुआ करता था।साथ में एक कुआं भी हुआ करता था।

खिड़कियां और दरवाजे हवा आने के लिए बनायें जाती थी। दरवाजे गली की ओर खुला करते थे।

विशाल स्नानगृह

मोहनजोदड़ो में विशाल स्नानगृह प्राप्त हुआ था। विशाल स्नानगृह उस समय की बहुत बड़ी इंजीनियरिंग कला का उदार था। विशाल स्नानगृह 180 फुट लंबा 108 फुट चौड़ा था। इसके बीच में 40 फुट लंबा 14 फुट चौड़ा और 8 फुट गहरा एक बहुत बड़ा कुआँ था।

विशाल स्नानगृह का पानी कुएं में डाला जाता था। विशाल स्नानगृह से गंदे पानी को निकालने की अच्छी व्यवस्था की हुई थी। विशाल स्नानगृह में नहाने के लिए सीढ़ियां लगाई हुई थी।

इसके साथ में एक बहुत बड़ा कमरा भी बनाया गया था। जिसे यह अनुमान लगाया जाता है कि धार्मिक उत्सव होने पर यह लोग स्नान किया करते थे।

अन्य भवन

हड़प्पा सभ्यता में अन्य भवन भी प्राप्त हुई थे। यह अधिक हडप्पा मोहनजोदड़ो और लोथल में प्राप्त हुए थे। हड़प्पा के लोगो ने कुछ भवनों को अनाथ के भंडार बनाए हुए थे। हड़प्पा सभ्यता में कुछ सभा भवन भी मिले थे । इन से लगता है कि यह लोग बातचीत लिया करते थे। और इसमें से कुछ स्कूल विश्राम और सरायों जैसे भवन प्राप्त हुए हैं।

नालियों की व्यवस्था

हड़प्पा सभ्यता के लोग साफ और सफाई का पूरा तरह से ध्यान रखते थे।  हर एक घरों में नालियों की व्यवस्था थी। यह नालियाँ पानी के लिए बनाई जाती थी। नालियों का पानी बड़ी नदी में जाता था। हड़प्पा सभ्यता में नालियां पक्की हुआ करती थी और नालियाँ ऊपर से ढकी हुआ करती थी। ताकि नालियों में कूड़ा और करकट ना पड़ जाए और नालियों में कूड़ा फैलाना मना था।

सड़कें

हड़प्पा सभ्यता के लोगों की सड़कें चौड़ी और पक्की चौड़ी हुआ करती थी। इनकी चौड़ी 13 फुट से लेकर 34 फुट तक होती थी। हड़प्पा सभ्यता के नगर के चारों ओर सड़के बनाई हुई थी। सड़कों में चौराहे भी रखे जाते थे। सड़के एक दूसरे को समकोण की तरह कटती थी। ताकि हवा चले तो सड़कें अपने आप साफ हो जाएं। सड़कों में रात के समय रोशनी की व्यवस्था की गई थी।

हड़प्पा सभ्यता लोगों का सामाजिक जीवन

परिवार

हड़प्पा सभ्यता का परिवार संयुक्त परिवार की व्यवस्था अपनाया हुआ था।  यह हम उनके भवन को देख कर कहते हैं खुदाई के दौरान स्त्रियों की मूर्तियां अधिक प्राप्त होने के कारण हम यह कह सकते हैं ,कि मातृ प्रधान परिवार था घर की बड़ी सदस्य कोई बूढ़ी स्त्री ही हुआ करती थी।

भोजन व वस्त्र

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का मुख्य भोजन गेहूं,जौ,चावल तिल और दूध दही मक्खन घी और खजूर और सब्जियों का भी सेवन किया करते थे। कुछ लोग मांसाहारी भी थे ,जोकि सूअर और भेड़ मछली का मांस खाया करते थे। शायद हम कह सकते हैं । यह लोग अंडे को भी खाया करते थे।

हड़प्पा के लोगों सूती और ऊनी वस्त्र पहना करते थे। स्त्रियां लहंगा चोली और ऊपर वाले हिस्से में चादर जैसे पहना पहनती थी वह सिर में आकर्षण पंखे जैसे वस्तुओं का उपयोग करते थे। पुरुष धोती और ऊपर वाले हिस्से में ढीला ढाला चोला पहना करते थे। साथ में पगड़ी भी लगाया करते थे।

सामाजिक वर्ग

हड़प्पा सभ्यता का समाज जाति के आधार पर नहीं बैठा हुआ था बल्कि आर्थिक के आधार पर बैठा हुआ था

1.उच्च वर्ग

उच्च वर्ग में शासक व्यापारी एवं बड़े सरकारी कर्मचारी को रखा होता था। हड़प्पा सभ्यता के उच्च वर्ग के लोगों बड़े भवनों में रहते ,स्वादिष्ट खाना खाते और सुंदर आभूषण का प्रयोग करते थे।

2.मध्य वर्ग

उनका जीवन भी सुखमय व्यतीत हुआ करता था।

3.निम्न वर्ग

निम्न वर्ग में किसान और मजदूर शामिल स थे। जिनकी स्थिति अच्छी नहीं थी।

आभूषण एवं श्रृंगार

हड़प्पा सभ्यता की स्त्री और पुरुष दोनों आभूषण के शौकीन थे। आभूषण सोने चांदी और हाथी के दांत और कीमती पत्थरों एवं तांबे की हड्डियों के बने हुआ करते थे।आभूषण में कंगन चूड़ियां हार और अंगूठी वालिया आदि पहना करती थी।

हड़प्पा सभ्यता की स्त्री और पुरुष दोनों फैशन की वस्तुओं का आयात किया करते थे।औरतें लिपिस्टिक चोटियां और सुगंधित तेल का उपयोग करते थे। पुरुष सुंदर दिखने के लिए काजल का प्रयोग भी किया करते थे।

स्त्रियों की स्थिति

हड़प्पा सभ्यता में खुदाई के दौरान अधिकतम मिली स्त्रियों की मूर्तियों के कारण हम यह कह सकते हैं,कि स्त्रियों की स्थिति समाज में काफी अच्छी थी।

मनोरंजन

हड़प्पा सभ्यता के लोगों के मनोरंजन के मुख्य साधन पासे फेंक,ताश खेलना,पशु पक्षियों की लड़ाई करवाना,गाने को गाना, ढोल को बजाना बैलगाड़ी आदि मुख्य साधन थे।

मृतक संस्कार

हड़प्पा सभ्यता के लोग मृत संस्कार 3 प्रकार से किया करते थे।

  1. पहले के तहत शव को जला देते और फिर राख को एक बर्तन में डाल कर दफना देते दूसरे देते थे।
  2. दूसरे के तहत वो शव को दफना  देते और उसके साथ कुछ भोजन की सामग्री वस्त्र आभूषणों को साथ ही दफना देते थे।  कि आगे भी इन सभी चीजों की जरूरत आदमी को होगी।
  3. तीसरे के तहत सबको पशु पक्षियों को खाने के लिए फेंक देते हैं और उसके बाद हड्डियों को इकट्ठा करते दफना देते थे ।

आर्थिक जीवन

कृषि

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि था। सिंध नदी के आसपास की जमीन काफी उपजाऊ थी। कृषि बैलों को जोड़कर हल से की जाती थी। सिंचाई के लिए नहरों की व्यवस्था की जाती थी। वह प्रमुख चने दाल गेहूं,सब्जियां,मटर चावल और कपास की खेती करते थे।

पशु-पालन

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का दूसरा व्यवसाय पशु-पालना था। यह लोग दूध,मांस उनके कृषि के कार्य और भार को ढूंढने के लिए इनका प्रयोग किया करते थे।

यह लोग गाय,भैंस,भेड़,बकरी,बैल,कुत्ते,बिल्ली,मोर,हिरण,हाथी शुगर,बकरी,मुर्गियां पाला करते थे। इन लोगों को घोड़े और लोहे की जानकारी नहीं थी।

उद्योग

हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया। हड़प्पा सभ्यता के लोगो के सूती और ऊनी वस्त्र के उद्योग हुआ करते थे।

इसके साथ सोने चांदी आभूषण के उद्योग,बर्तन बनाने के उद्योग,हाथी दांत के उद्योग,और लकड़ी से फर्नीचर बनाने के उंद्योग आदि किया करते थे। उनके मनके के उद्योग भी बहुत प्रसिद्ध थे।

व्यापार

हड़प्पा सभ्यता के लोगों की व्यापारिक स्थिति काफी अच्छी थी। उनका आंतरिक और बाहरी व्यापार काफी अच्छे थे। उनका अधिकतम व्यापार  से हुआ करता था।

उनका व्यापार जल,थल दोनों मार्ग से ही हुआ करता था। हड़प्पा सभ्यता के लोगों दूसरे देशों से सोना,चांदी,कीमती पत्थर की वस्तुएं,और दवाईयां आयात करते थे। और दूसरे देशों में आभूषण हाथी दांत का सामान,सूती वस्त्र,लंगूर आदि निर्यात किया करते थे।

मापतोल

हड़प्पा सभ्यता के लोगों ने नाप तोल की अच्छी व्यवस्था हुई थी। खुदाई के दौरान हमें कई बाट प्राप्त हुए हैं जो कि पत्थर के बने हुए थे। यह जिस पत्थर के बने हुए थे उसको चर्ट कहा जाता था। यह वाट इतने बड़े मिले हैं जिनको रसियों से उठाया जाता है।

कुछ वाट इतने छोटे मिले थे जिनसे हम अनुमान कर सकतें  है, कि इनका उपयोग आभूषणों को तोलने के लिए किया जाता था। सभी जगह पर एक अनुपात के बाट मिलने से यह अनुमान होता है कि सरकार का इन पर निरतंर था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *